
झालावाड़। राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी जयपुर द्वारा 3 जून 2025 को जारी आदेश में नर्सिंग ऑफिसर्स (नर्स ग्रेड-II) का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹13,150 प्रतिमाह करने की घोषणा तो बड़े जोर-शोर से कर दी गई, लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में आज तक पुराना वेतन ही “सेवा भाव” के साथ परोसा जा रहा है।
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी ने सरकारी सिस्टम की चाल पर ऐसा पर्दा उठाया कि कर्मचारी भी सोच में पड़ गए — “आदेश जयपुर से निकला था या रास्ते में कहीं फाइलों के ट्रैफिक जाम में फंस गया?”
जानकारी के अनुसार प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों — जोधपुर, बांसवाड़ा, नागौर और भरतपुर में बढ़ा हुआ वेतन लागू कर दिया गया, लेकिन झालावाड़ में नर्सिंग ऑफिसर्स को अब भी लगभग ₹8144 का पुराना वेतन देकर “संतोष ही सबसे बड़ा धन है” वाली नीति पर चलाया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि आदेश की स्याही सूख गई, कई कॉलेजों में वेतन भी बढ़ गया, लेकिन झालावाड़ में फाइलें शायद अब भी “विचाराधीन योग” में लीन हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब बाकी जिलों में बढ़ा वेतन पहुंच सकता है, तो झालावाड़ तक आते-आते सरकारी पहिए पंचर कैसे हो जाते हैं?
अब नर्सिंग कर्मियों को इंतजार है उस शुभ घड़ी का, जब बढ़ा हुआ वेतन सिर्फ आदेशों में नहीं, बल्कि उनके बैंक खातों में भी दिखाई देगा।









